
इंदौर क्राइम ब्रांच के तत्कालीन टीआई सुजीत श्रीवास्तव सहित 4 लोगों के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। लोकायुक्त से मिली जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता महिला के बेटे को एक शिकायत के सिलसिले में क्राइम ब्रांच कार्यालय बुलाया गया था। इसके बाद उसके खिलाफ कोई कार्रवाई न करने और छोड़ने के एवज में रिश्वत की मांग की गई थी। मामले में लोकायुक्त ने शिकायत के सत्यापन के साथ-साथ उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच की। जांच के बाद सोमवार 24 अगस्त को भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम की धारा 7 और बीएनएस की धारा 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। वर्तमान में टीआई सुजीत श्रीवास्तव डीआरपी लाइन में पदस्थ हैं, जबकि मामले में शामिल एक अन्य आरक्षक क्राइम ब्रांच में ही अपनी सेवाएं दे रहा है। यह हैं आरोपी सुजीत श्रीवास्तव, तत्कालीन निरीक्षक, अपराध शाखा (क्राईम ब्रांच) इंदौर अभय सिंह, निजी ड्राइवर विकास सेंधव, तत्कालीन आरक्षक, अपराध शाखा (क्राईम ब्रांच) इंदौर दीपक पटेल, प्रायवेट व्यक्ति निवासी-इंदौर 1.20 लाख रुपए रिश्वत मांगने का आरोप लोकायुक्त संभाग इंदौर के पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय ने बताया कि तुलसी नगर निवासी प्रीति हजारी ने 2 अप्रैल 2026 को लोकायुक्त पुलिस के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। उन्होंने बताया था कि उनके बेटे प्रांजल हजारी को एक शिकायत के आधार पर क्राइम ब्रांच कार्यालय बुलाया गया था। प्रकरण में कार्रवाई न करने और प्रांजल को छोड़ने के बदले तत्कालीन क्राइम ब्रांच टीआई सुजीत श्रीवास्तव और अन्य पुलिसकर्मी ने 1.20 लाख रुपए की रिश्वत की मांग की थी। इसके बाद 20 मार्च को प्रांजल से 50 हजार 800 रुपए यूपीआई के जरिए दीपक पटेल नामक व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर करवाए गए, जबकि शेष 70 हजार रुपए नकद रूप में लिए गए। शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन के साथ लेन-देन से संबंधित तकनीकी साक्ष्य भी लोकायुक्त को सौंपे थे। तकनीकी साक्ष्यों का किया गया सत्यापन आवेदन प्राप्त होने के उपरांत लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय के निर्देश पर शिकायत का भौतिक व तकनीकी सत्यापन कराया गया। सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा सौंपे गए तकनीकी साक्ष्यों और अन्य संबंधित तथ्यों की सूक्ष्मता से जांच की गई। जांच में शिकायत प्रथम दृष्टया सत्य पाई गई, जिसके पश्चात चारों आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया। रीगल चौराहा स्थित कार्यालय में हुई घटना इस पूरे मामले का घटनास्थल पुलिस क्राइम ब्रांच कार्यालय रीगल चौराहा बताया गया है। लोकायुक्त के अनुसार प्रांजल को एक शिकायत के संबंध में क्राइम ब्रांच के इसी कार्यालय में बुलाया गया था, जहां उससे रिश्वत मांगी गई थी। लोकायुक्त पुलिस ने मामला दर्ज कर विस्तृत विवेचना शुरू कर दी है। आगामी जांच में रिश्वत की मांग, राशि के लेन-देन और आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं की पड़ताल की जाएगी।
📍 स्थान: मध्य प्रदेश, भारत (Madhya Pradesh, India)
स्रोत (Source): Amar Ujala — MP
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